Hindi Project III कुछ और कवितायेँ। Badal raag झूम - झूम मृदु गरज - गरज घन घोर। राग अमर ! अम्बर में भर निज रोर ! झर झर झर निर्झर - गिरि - सर में , घर , मरु , तरु - मर्मर , सागर में , सरित - तड़ित - गति - चकित पवन में , मन में , विजन - गहन - कानन में , आनन - आनन में , रव घोर - कठोर - राग अमर ! अम्बर में भर निज रोर ! अरे वर्ष के हर्ष ! बरस तू बरस - बरस रसधार ! पार ले चल तू मुझको , बहा , दिखा मुझको भी निज गर्जन - भैरव - संसार ! उथल - पुथल कर हृदय - मचा हलचल - चल रे चल - मेरे पागल बादल ! धँसता दलदल हँसता है नद खल् - खल् बहता , कहता कुलकुल कलकल कलकल। देख - देख नाचता हृदय बहने को महा विकल - बेकल , इस मरोर से - इसी शोर से - सघन घोर गुरु गहन रोर से मुझे गगन का दिखा सघन वह छोर ! राग अमर ! अम्बर में भर निज रोर ! ………………………...
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